motivation लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
motivation लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

रविवार, 11 दिसंबर 2016

आज तो घर छोंड ही दूंगा ! - युवा जरुर पढ़े यह कहानी

ध्यान से पढ़ा तो आँखों में पानी आ जाएगा.

बड़े गुस्से से मैं घर से चला आया ..

इतना गुस्सा था की गलती से पापा के ही जूते पहन के निकल गया
मैं आज बस घर छोड़ दूंगा, और तभी लौटूंगा जब बहुत बड़ा आदमी बन जाऊंगा ...


जब मोटर साइकिल नहीं दिलवा सकते थे, तो क्यूँ इंजीनियर बनाने के सपने देखतें है .....
आज मैं पापा का पर्स भी उठा लाया था .... जिसे किसी को हाथ तक न लगाने देते थे ...

मुझे पता है इस पर्स मैं जरुर पैसो के हिसाब की डायरी होगी ....
पता तो चले कितना माल छुपाया है .....
माँ से भी ...

इसीलिए हाथ नहीं लगाने देते किसी को..

जैसे ही मैं कच्चे रास्ते से सड़क पर आया, मुझे लगा जूतों में कुछ चुभ रहा है ....
मैंने जूता निकाल कर देखा .....
मेरी एडी से थोडा सा खून रिस आया था ...
जूते की कोई कील निकली हुयी थी, दर्द तो हुआ पर गुस्सा बहुत था ..

और मुझे जाना ही था घर छोड़कर ...(यह आप mysir.in पर पढ़ रहे है )

जैसे ही कुछ दूर चला ....
मुझे पांवो में गिला गिला लगा, सड़क पर पानी बिखरा पड़ा था ....
पाँव उठा के देखा तो जूते का तला टुटा था .....

जैसे तेसे लंगडाकर बस स्टॉप पहुंचा, पता चला एक घंटे तक कोई बस नहीं थी .....

मैंने सोचा क्यों न पर्स की तलाशी ली जाये ....

मैंने पर्स खोला, एक पर्ची दिखाई दी, लिखा था..
लैपटॉप के लिए 40 हजार उधार लिए
पर लैपटॉप तो घर मैं मेरे पास है ?

दूसरा एक मुड़ा हुआ पन्ना देखा, उसमे उनके ऑफिस की किसी हॉबी डे का लिखा था
उन्होंने हॉबी लिखी अच्छे जूते पहनना ......
ओह....अच्छे जुते पहनना ???
पर उनके जुते तो ...........!!!!

माँ पिछले चार महीने से हर पहली को कहती है नए जुते ले लो ...
और वे हर बार कहते "अभी तो 6 महीने जूते और चलेंगे .."
मैं अब समझा कितने चलेंगे

......तीसरी पर्ची ..........
पुराना स्कूटर दीजिये एक्सचेंज में नयी मोटर साइकिल ले जाइये ...
पढ़ते ही दिमाग घूम गया.....
पापा का स्कूटर .............
ओह्ह्ह्ह


मैं घर की और भागा........
अब पांवो में वो कील नही चुभ रही थी ....

मैं घर पहुंचा .....
न पापा थे न स्कूटर ..............
ओह्ह्ह नही
मैं समझ गया कहाँ गए ....

मैं दौड़ा .....
और
एजेंसी पर पहुंचा......
पापा वहीँ थे ...............

मैंने उनको गले से लगा लिया, और आंसुओ से उनका कन्धा भिगो दिया ..(यह आप mysir.in पर पढ़ रहे है )

.....नहीं...पापा नहीं........ मुझे नहीं चाहिए मोटर साइकिल...

बस आप नए जुते ले लो और मुझे अब बड़ा आदमी बनना है..

वो भी आपके तरीके से ...।।
अगर इस कहानी ने थोडा भी आप पर असर डाला हो तो इसे दोस्तों में शेयर करना न भूले ..लगातार नयी अपडेट पाने के लिए लाइक करे हमारा फेसबुक पेज  www.fb.com/mysir.india या फिर हमारा एप्प डाऊनलोड कर ले इस लिंक से www.a.mysir.in यह पोस्ट भी पढ़े  ..
>>आजीवन सुखमय कैसे रहे ? कौवे और मोर की लघु कथा ! Crows and peacocks short story

शनिवार, 5 नवंबर 2016

बहानाइटीस : कंही आप भी तो बहाने नहीं बनते ? सफलता का राज !

दोस्तों हम सब में यह आदत होती है , अब यह अच्छी है या बुरी इसके बारे में तो आप को यह पोस्ट पढ़ने के बाद ही पता चलेगा ! लेकिन एक बात तो है की हजरों नहीं लाखो ने यह बात कही है की हमारी सफलता और बहनों का बहुत ही गहरा सम्बन्ध होता है ! ऐसे ही यंहा आप को कई बहाने और उसके तोड़ मिलेंगे ... 

1- मुझे उचित शिक्षा लेने का 
अवसर नही मिला... 

उचित शिक्षा का अवसर 
फोर्ड मोटर्स के मालिक 
हेनरी फोर्ड को भी नही मिला ।
**********************

2- मै इतनी बार हार चूका , 
अब हिम्मत नही...

अब्राहम लिंकन 15 बार 
चुनाव हारने के बाद राष्ट्रपति बने।
**********************

3- मै अत्यंत गरीब घर से हूँ ...

पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम भी 
गरीब घर से थे ।
*********************

4- बचपन से ही अस्वस्थ था...

आँस्कर विजेता अभिनेत्री 
मरली मेटलिन भी बचपन से 
बहरी व अस्वस्थ थी ।

5 - मैने साइकिल पर घूमकर 
आधी ज़िंदगी गुजारी है...

निरमा के करसन भाई पटेल ने भी 
साइकिल पर निरमा बेचकर 
आधी ज़िंदगी गुजारी ।
**********************

6- एक दुर्घटना मे 
अपाहिज होने के बाद 
मेरी हिम्मत चली गयी...

प्रख्यात नृत्यांगना 
सुधा चन्द्रन के पैर नकली है ।
**************************

7- मुझे बचपन से मंद बुद्धि 

कहा जाता है...

थामस अल्वा एडीसन को भी 
बचपन से मंदबुद्धि कहा जता था।
************************

8- बचपन मे ही मेरे पिता का 
देहाँत हो गया था...

प्रख्यात संगीतकार 
ए.आर.रहमान के पिता का भी 
देहांत बचपन मे हो गया था।
***********************

9- मुझे बचपन से परिवार की 
जिम्मेदारी उठानी पङी...

लता मंगेशकर को भी 
बचपन से परिवार की जिम्मेदारी 
उठानी पङी थी।
*********************

10- मेरी लंबाई बहुत कम है...

सचिन तेंदुलकर की भी 
लंबाई कम है।
*********************

11- मै एक छोटी सी 
नौकरी करता हूँ ,

इससे क्या होगा... 
धीरु भाई अंबानी भी 
छोटी नौकरी करते थे।
**********************

12- मेरी कम्पनी एक बार 
दिवालिया हो चुकी है , 
अब मुझ पर कौन भरोसा करेगा...

दुनिया की सबसे बङी 
शीतल पेय निर्माता पेप्सी भी 
दो बार दिवालिया हो चुकी है ।
*********************

13- मेरा दो बार नर्वस 
ब्रेकडाउन हो चुका है , 
अब क्या कर पाउँगा...

डिज्नीलैंड बनाने के पहले 
वाल्ट डिज्नी का तीन बार 
नर्वस ब्रेकडाउन हुआ था।
**************************


14- मेरी उम्र बहुत ज्यादा है...

विश्व प्रसिद्ध केंटुकी फ्राइड चिकेन (के एफ सी)
के मालिक ने 60 साल की उम्र मे 
पहला रेस्तरा खोला था।
*********************

15- मेरे पास बहुमूल्य आइडिया है 
पर लोग अस्वीकार कर देते है...

जेराँक्स फोटो कापी मशीन के 
आईडिया को भी ढेरो कंपनियो ने 
अस्वीकार किया था पर आज 
परिणाम सामने है ।
*************************

16- मेरे पास धन नही...

इन्फोसिस के पूर्व चेयरमैन 
नारायणमूर्ति के पास भी धन नही था 
उन्हे अपनी पत्नी के गहने बेचने पङे।
*************************

17- मुझे ढेरो बीमारियां है..

वर्जिन एयरलाइंस के प्रमुख भी 
अनेको बीमारियो मे थे | 
राष्ट्रपति रुजवेल्ट के दोनो पैर 
काम नही करते थे।
*************************

आज आप जहाँ भी है 
या कल जहाँ भी होगे 

इसके लिए आप किसी और को 
जिम्मेदार नही ठहरा सकते , 
इसलिए आज चुनाव करिये -
सफलता और सपने चाहिए 
या खोखले बहाने ...
आप को यह पोस्ट कैसी लगी मुझे तो बहुत अच्छी तो अपने दोस्तों में भी शेअर करे इसे फेसबुक , whatsapp आदि - आदि ......और हा अभी इसे दोस्तों में शेअर करो अभी कोई बहाना मत बनाना ओके नहीं तो इसी में फस के रह जाओगे ! शेएर करो खुद को केअर करो ....


मंगलवार, 1 नवंबर 2016

आजीवन सुखमय कैसे रहे ? कौवे और मोर की लघु कथा ! Crows and peacocks short story

कृपया यह कहानी बड़े भी जरुर पढ़े ,दोस्तों आज मैं आपको एक बहुत ही विचार पूर्ण कहानी सुनाऊंगा यह कहानी एक कौवे की है यह कौवा एक जंगल में रहता था और उसके पास उसका परिवार था वह बहुत ही खुशी पूर्वक अपना जीवन यापन कर रहा था उसे अपने जीवन में किसी भी तरह की कोई कमी नहीं थीं , किंतु एक दिन वह पानी की तलाश में जंगल से थोड़ा दूर निकल आया वही कुछ दूर पर एक तालाब था जिस में एक हंस तैर रहा था कौवा , हंस को देखकर मोहित हो गया उसे उसका सफेद रंग बहुत ही ज्यादा पसंद आया

और वह अपने आप में सोचने लगा कि काश वह भी इस हंस की तरह  एकदम दूध की तरह सफेद होता है और लोग उस से  भी प्यार करते यह सोचते सोचते वह हंस के पास पहुंचा और हंस के कहने लगा तुम्हारी जिंदगी तो  कितनी अच्छी है तुम कितने सुंदर हो पूरी तरह से  दूध की तरह सफेद तब हंस बोला नहीं दोस्त मैं भी इतना सुंदर नहीं मैं पहले यही सोचता था जब तक मैंने तोते को  नहीं मिला था लेकिन तोता तो  मुझसे भी ज्यादा अच्छा होता है वह दो रंग का होता है तो कौवे  ने पूछा क्या सच में वह इतना सुन्दर होता है यह जानने के लिए वह तोते की खोजने निकल पड़ा कुछ दूर पर उसे कुछ तोते दाना चुगते हुए मिल गए कौए ने उनमे से एक से कहा की सच में भगवान ने तुम्हे कितना सुन्दर बनाया है पर इस पर तोता बोल उठा नहीं यह सच नहीं है काश मुझे भगवान् इतना सुन्दर बनाते मुझ से ज्यादा सुन्दर तो मोर है वह कई रंगों का राजा है , तब कौवे ने कहा और मै यदि मोर से मिलना चाहू तो उससे कन्हा मिल सकता हु तब तोते ने कहा अरे भाई उसकी तो चांदी है यंही बगल वाले चिड़िया घर में रहता है .. मन मर्जी खाने को मिलता है लोग की तो भीड़ लगती है उसे देखने के लिए वंही वो तुम्हे मिलेगा .. कौवा मोर से मिलने उड़ा और मन में ईस्वर (गॉड) को कोसने लगा की भगवन आप ने इस दुनिया को कितना सुन्दर बनाया है

आखिर मुझ से क्या गलती हो गई थी जो मुझे तूने एशा बनाया ......तभी वह मोर के पास पहुच जाता है और अपनी आँखों से देखता है की बहुत से लोग उसे देखने आ रहे है और उसे दाना डाल रहे है . कौवा मोर से जाकर कहता है यार तुम्हारी ज़िदगी तो बहुत ही बढ़िया है जरुर तुमने पिछले जन्म में बहुत अच्छे कार्य किये होंगे जो तुम इस जन्म में मोर बने हो ....तब मोर उसे सुनता रहा और बात ख़त्म होते होते उसकी आँखों में आंसू आ गए वह बोला नहीं बल्की मै तो यह सोचता हु की आखिर मैने कौन से दुस्पाप किये होंगे जो मुझे भगवन ने इतना सुन्दर बनाया अब यह सुन्दरता ही मेरी आजादी की बाधा बन रही है मुझे यह भोजन यह सुन्दरता कुच्छ भी नहीं चाहिए बस आजादी चाहिये ..मैने पता किया है की इस चिड़ियाघर में केवल कौवे को छोंड़ का बाकि सब चिडियों को पिंजड़ो में कैद कर रखा गया है कास भगवान् ने मुझे तुम जैशा  बनाया होता , बस इतना कहना था की कौवा से उड़ गया और भगवान से अपने कहे शब्दों के लिए माफ़ी मांगने लगा और धन्यवाद भी दिया उसकी आंखे खोलने के लिए .
निष्कर्स - "यही हमारी सब मुसीबतों की जड़ है की हम अकारण ही लोगो से अपनी तुलना करके स्वयं दुखी होते है , हमे जो भगवान  ने दिया है हम उसे नहीं देखते बल्कि हमारे पास जो नहीं है हम उसके बारे में सोच के दुखी होते है ..जो इंसान यह सोच कर जिंदगी जिए की भगवान् ने उसे बहुत कुछ दिया है क्योकि किसी के पास तो यह भी नहीं है वाही इस दुनिया का सबसे सुखी इंसान होगा ..किसी चीज को पाने की चाहत रखना और उसे पाना बुरा नहीं है बल्कि जो नहीं है उसे प्रति दुखी होना बुरा है "
इसे अपने दोस्तों में भी ज्यादा से ज्यादा शेएर करे क्या पता जो ज्ञान अभी पा रहे हो उसका 1 प्रतिसत हिशा भी किसी के पास न हो !